जम्मू। पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। कभी सीज फायर का उल्लंघन कर रहा है तो कभी भारतीय सीमा में घुसपैठ की कोशिश में लगा हुआ है। जम्मू कश्मीर के हंदवाडा में सेना के काफीले पर बुधवार तडके आतंकी हमला हुआ। जिसमें तीन जवान जख्मी हो गए है। सेना के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक सेना के काफिले पर हमला उस समय किया जब जवान गश्त से लौट रहे थे। इसी दौरान पहले से घात लगाकर बैठे आतंकियों ने हंदवाडा सेक्टर में सेना के जवानों पर हमला बोल दिया। जिसमें तीन जवान घायल हो गए है। भारतीय सेना ने भी आतंकियों पर फायरिंग की, लेकिन वे फरार हो गए। इसके बाद सेना ने पूरे इलाके पर सर्च ऑपरेशन शुरू कर दिया है। उधर, घायल जवानों को अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।आपको बता दें कि इससे पहले मंगलवार को पाकिस्तानी सेना ने पुंछ जिले में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास भारतीय ठिकानों पर अकारण अंधाधुंध गोलीबारी की। भारतीय सैनिकों ने भी उचित रूप से जवाबी कार्रवाई की है। दोनों ओर से रुक-रुक कर गोलीबारी करीब पांच घंटे तक चली।
बुधवार, 7 सितंबर 2016
पाक की धमकी: कश्मीर हमारे गले की नस, अब युद्ध में हराना नामुमकिन
इस्लामाबाद। पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। पाक ने एकबार फिर से कश्मीर को लेकर विवादित बयान दिया है। पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल राहील ने मंगलवार को कहा कि कश्मीर घाटी के लोगों का पाकिस्तान कूटनीतिक और नैतिक मोर्चों पर समर्थन करता रहेगा। साथ ही जनरल राहील ने कश्मीर को पाकिस्तान की गले की नस भी बताया। पाकिस्तान सेना प्रमुख रक्षा दिवस के मौके पर रावलपिंडी में जनरल हेडक्वार्टस में आयोजित एक कार्यक्रम में शिरकत कर रहे थे।
कार्यक्रम में बोलते हुए जनरल राहील ने कहा कि कश्मीर पाकिस्तान के गले की नस है। उन्होनें कहा कि हम कश्मीर के लोगों के आत्मनिर्णय के अधिकार के लिए किये गए बलिदानों को सलाम करते हैं। मुद्दे का हल इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों को लागू करने में निहित है। साथ ही उन्होनें कूटनीतिक और नैतिक मोर्चों पर कश्मीर के लोगों का समर्थन करने की बात भी कही।
साथ ही राहील ने बिना नाम लिए कहा कि मैं सभी दुश्मनों से स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि पाकिस्तान रक्षा पहले से ही मजबूत थी और अब ये अजेय हो गई है। साथ ही जनरल राहील ने कहा कि हम अपने दुश्मनों के इरादों को खूब जानते हैं। उनहोनें कहा कि चुनौती कूटनीतिक हो या फिर सैन्य, चुनौती सामी पर हो या फिर शहरों के भीतर, हम अपने दोस्तों और दुश्मनों को अच्छी तरह जानते हैं।
मंगलवार, 6 सितंबर 2016
कैट नहीं गईं स्कूल, सलमान ने बीच में छोड़ा कॉलेज, ऐसी रही इन सेलेब्स की पढ़ाई
.फिल्म इंडस्ट्री में एजिकेश्नल क्वालिफिकेशन की बात की जाए तो जहां एक ओर अमिताभ बच्चन, विद्या बालन और आर माधवन जैसे हाइली एजुकेटेड स्टार्स मिल जाएंगे। वहीं, कई सेलेब्स ऐसे भी हैं, जो पढ़ाई में बहुत पीछे रहे हैं। मसलन, 'बार बार देखो' की एक्ट्रेस कैटरीना कैफ का बचपन करीब 18 देशों में बीता है। ट्रैवलिंग के चलते वे स्कूल में नहीं पढ़ पाईं। उनके लिए होम ट्यूटर लगा हुआ था। 14 साल की उम्र में तो कैटरीना ने मॉडलिंग करनी भी शुरू कर दी थी। सलमान ने बीच में छोड़ दी थी पढ़ाई...
सलमान खान कुछ साल ग्वालियर के सिंधिया स्कूल में पढ़े हैं। इसके बाद उन्होंने मुंबई के St. Stanislaus High School से आगे की पढ़ाई पूरी की। सलमान भी कॉलेज ड्रॉपआउट हैं। उन्होंने बांद्रा स्थित नेशनल कॉलेज में एडमिशन लिया था।
ऐश्वर्या राय - बीच में ही छोड़ा कॉलेज
मॉडलिंग में करियर बनाने के लिए ऐश्वर्या ने बीच में ही कॉलेज छोड़ दिया था। दरअसल ऐश्वर्या ने मुंबई के आर्य विद्या मंदिर से हाईस्कूल करने के बाद एक साल तक जयहिंद कॉलेज में पढ़ाई की। बाद में वो आर्किटेक्चर की पढ़ाई के लिए रहेजा कॉलेज गईं लेकिन मॉडलिंग में करियर बनाने के लिए उन्होंने कॉलेज बीच में ही छोड़ दिया।
आमिर खान - 12वीं के बाद नहीं की पढ़ाई
आमिर हमेशा से ही फिल्मों में करियर बनाने के लिए उत्सुक थे। पढ़ाई करने से ज्यादा उनको करियर बनाने की जल्दी थी। 12वीं के बाद आमिर ने पढ़ाई छोड़कर एक्टिंग की बारीकियां सीखना शुरू कर दिया था।
आलिया भट्ट - स्कूल के बाद की पहली फिल्म
2012 में फिल्म स्टूडेंट ऑफ द ईयर से डेब्यू करने वाली आलिया ने स्कूल के बाद ही फिल्म करना शुरू कर दी थी। फिर लगातार मिल रहे फिल्मों के ऑफर के बाद अब तक उन्हें आगे की पढ़ाई करने का वक्त नहीं मिला है
रणबीर कपूर - बीच में छोड़ी कॉलेज की पढ़ाई
बॉम्बे स्कॉटिश स्कूल में शुरुआती पढ़ाई के बाद रणबीर कपूर ने मुंबई के एचआर कॉलेज में एडमिशन लिया, लेकिन दो साल के बाद उन्होंने कोर्स बीच में ही छोड़ दिया और एक्टिंग का कोर्स करने न्यूयॉर्क चले गए थे।
करिश्मा कपूर - पांचवी तक की पढ़ाई
बॉलीवुड में लोलो के नाम से मशहूर करिश्मा कपूर ने सिर्फ पांचवी तक ही पढ़ाई की है। करिश्मा जब छठवीं क्लास में थीं तो उन्होंने एक्टिंग फील्ड में करियर बनाने के लिए बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी थी।
शाहरुख खान - बीच में ही छोड़ी पढ़ाई
किंग खान दिल्ली के हंसराज कॉलेज के स्टूडेंट रहे हैं। इकोनॉमिक्स में ग्रैजुएशन के बाद उन्होंने दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रैजुएशन के लिए एडमिशन लिया था, लेकिन करियर के लिए उन्हें बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ी।
प्रियंका चोपड़ा - मिस वर्ल्ड बनते ही छूटी पढ़ाई
लखनऊ में शुरुआती पढ़ाई के बाद प्रियंका ने हाई स्कूल तक की पढ़ाई अमेरिका से की। आगे की पढ़ाई उन्होंने बरेली के आर्मी स्कूल से की। मिस इंडिया बनने और मॉडलिंग में आने से पहले उन्होंने कुछ दिनों तक मुंबई का जय हिंद कॉलेज अटेंड किया था
12वी फेल हैं अर्जुन कपूर
फिल्मी फैमिली से ताल्लुक रखने वाले अर्जुन 12वीं के बोर्ड एग्जाम में फेल हो गए थे। इसके बाद उन्होंने पढ़ाई छोड़ने का मन बना लिया और अपने पिता को असिस्ट करने लगे। लगता नहीं कि अब सफल एक्टर बन चुके अर्जुन का पढ़ाई करने का कोई मूड है।
सोमवार, 5 सितंबर 2016
आज मिलेंगे मोदी-ओबामा; NSG पर ऑस्ट्रेलिया के बाद जापान ने भी किया सपोर्ट
आज मिलेंगे मोदी-ओबामा; NSG पर ऑस्ट्रेलिया के बाद जापान ने भी किया सपोर्ट
हांगझोऊ (चीन). यहां चल रहे G-20 समिट में सोमवार को नरेंद्र मोदी और बराक ओबामा की मुलाकात होगी। दोनों नेताओं की ये आठवीं मुलाकात होगी। दोनों के बीच मजबूत केमिस्ट्री है। समिट में रविवार को फैमिली फोटो लेने के दौरान दोनों नेता नजर आए थे। ओबामा ने भारत में जीएसटी बिल पास किए जाने पर मोदी की तारीफ की थी। इस बीच न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) में भारत की एंट्री को लेकर ऑस्ट्रेलिया के बाद जापान ने भी सपोर्ट किया है। जापान ने क्या कहा...
- एनएसजी में भारत की एंट्री को लेकर जापान की तरफ से ऑफिशियल कमेंट आया है।
- जापान की फॉरेन मिनिस्ट्री ने कहा, 'भारत की एनएसजी में मौजूदगी से नॉन प्रोलिफिरेशन (परमाणु अप्रसार) को मदद मिलेगी।' चीन, भारत के NPT पर साइन न करने के चलते एनएसजी मेंबरशिप का विरोध कर रहा है।
- जापान के विदेश मंत्रालय के प्रेस एंड पब्लिक डिप्लोमेसी के डायरेक्टर जनरल यासुहीसा कावामूरा के मुताबिक, 'हम मामले पर भारत से लगातार चर्चा कर रहे हैं। हमारा मानना है कि भारत को एनएनजी मेंबरशिप मिलने से नॉन प्रोलिफिरेशन रिजीम को मजबूती मिलेगी। हम इसके लिए दूसरे मेंबर देशों से भी बात करेंगे। हम भारत से NPT पर साइन करने के लिए भी बात करेंगे।'
- चीन, भारत की मेंबरशिप का लगातार विरोध कर रहा है, इस मुद्दे पर कावामूरा ने कुछ भी कहने से मना कर दिया।
- बता दें कावामूरा भारत में जापान के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन रह चुके हैं।
- जापान के विदेश मंत्रालय के प्रेस एंड पब्लिक डिप्लोमेसी के डायरेक्टर जनरल यासुहीसा कावामूरा के मुताबिक, 'हम मामले पर भारत से लगातार चर्चा कर रहे हैं। हमारा मानना है कि भारत को एनएनजी मेंबरशिप मिलने से नॉन प्रोलिफिरेशन रिजीम को मजबूती मिलेगी। हम इसके लिए दूसरे मेंबर देशों से भी बात करेंगे। हम भारत से NPT पर साइन करने के लिए भी बात करेंगे।'
- चीन, भारत की मेंबरशिप का लगातार विरोध कर रहा है, इस मुद्दे पर कावामूरा ने कुछ भी कहने से मना कर दिया।
- बता दें कावामूरा भारत में जापान के डिप्टी चीफ ऑफ मिशन रह चुके हैं।
NSG पर ऑस्ट्रेलिया ने भी किया सपोर्ट
- मोदी ने रविवार को ऑस्ट्रेलिया के पीएम मैल्कम टर्नबुल से मुलाकात की। टर्नबुल ने भारत की एनएसजी में मेंबरशिप को लेकर भरोसा जताया। साथ ही दोनों नेताओं की डिफेंस और सिक्युरिटी कोऑपरेशन को लेकर भी बात हुई।
- मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के NSG पर सपोर्ट को लेकर टर्नबुल का शुक्रिया अदा किया।
- भारत के विदेश मंत्रालय के स्पोक्सपर्सन विकास स्वरूप के मुताबिक, 'ऑस्ट्रेलिया के पीएम ने एनएसजी में भारत की मेंबरशिप को लेकर सपोर्ट की बात कही है।'
- बता दें कि जून में सिओल में हुई NSG प्लेनरी की मीटिंग में चीन के विरोध के चलते भारत को मेंबरशिप नहीं मिल पाई थी।
- मोदी ने रविवार को ऑस्ट्रेलिया के पीएम मैल्कम टर्नबुल से मुलाकात की। टर्नबुल ने भारत की एनएसजी में मेंबरशिप को लेकर भरोसा जताया। साथ ही दोनों नेताओं की डिफेंस और सिक्युरिटी कोऑपरेशन को लेकर भी बात हुई।
- मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के NSG पर सपोर्ट को लेकर टर्नबुल का शुक्रिया अदा किया।
- भारत के विदेश मंत्रालय के स्पोक्सपर्सन विकास स्वरूप के मुताबिक, 'ऑस्ट्रेलिया के पीएम ने एनएसजी में भारत की मेंबरशिप को लेकर सपोर्ट की बात कही है।'
- बता दें कि जून में सिओल में हुई NSG प्लेनरी की मीटिंग में चीन के विरोध के चलते भारत को मेंबरशिप नहीं मिल पाई थी।
ओबामा ने कहा- मोदी साहसिक फैसले ले रहे हैं
- मोदी ने रविवार को ओबामा से मुलाकात की। इस दौरान ओबामा ने भारत में जीएसटी कानून पारित करने पर मोदी की तारीफ की।
- उन्होंने इसे मौजूदा आर्थिक स्थितियों में 'साहसी नीति' करार दिया। जी-20 सम्मेलन के लिए फैमिली फोटो लेने के वक्त मोदी ने बराक ओबामा से बातचीत की थी।
- उन्होंने इसे मौजूदा आर्थिक स्थितियों में 'साहसी नीति' करार दिया। जी-20 सम्मेलन के लिए फैमिली फोटो लेने के वक्त मोदी ने बराक ओबामा से बातचीत की थी।
क्यों खास होगी मोदी-ओबामा की मीटिंग?
1# साउथ चाइना सी
हाल ही में हेग (नीदरलैंड्स) इंटरनेशनल आर्बिट्रेशन कोर्ट ने साउथ चाइना सी में चीन की बढ़ती दखलअंदाजी को लेकर उसके खिलाफ फैसला सुनाया था। फिलीपींस ने इसको लेकर कोर्ट में अपील की थी। फैसले को लेकर चीन बैकफुट पर है। हालांकि, उसने ये भी कहा था कि वह फैसले को नहीं मानता।
2# NSG में भारत की एंट्री
- जून में हुई सिओल प्लेनरी की बैठक में भारत को एनएसजी में एंट्री नहीं मिली थी। चीन समेत कई देशों ने भारत का विरोध किया था।
- अब फिर से मोदी ओबामा से इस पर बात कर सकते हैं।
वर्ल्ड मीडिया में क्या चर्चा?
ग्लोबल टाइम्स (चीन): 1962 में मिली हार की दिलाई याद
मोदी के वियतनाम दौरे पर चीन के सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि दोनों देशों का चीन के साथ हुए युद्ध में हार का कड़वा इतिहास रहा है। चीन के बढ़ते प्रभाव के चलते दोनों देश संदेह की स्थिति में हैं। भारत हमेशा से अपनी तुलना चीन से करता रहा है। भारत-वियतनाम दोस्ती से चीन पर सीमित प्रभाव पड़ेगा। कुल मिलाकर जब वॉशिंगटन और जापान की ओर से वियतनाम को मिल रहे सपोर्ट से चीप पर कोई दबाव नहीं पड़ा, तो फिर भारत के समर्थन का क्या असर होगा?
डॉयचे वेले (जर्मनी): नए विवाद पैदा कर रहा चीन-पाक कॉरिडोर
मोदी का वियतनाम जाना इस बात का साफ संकेत है कि भारत आसानी से चीन के दबाव में आने वाला नहीं हैं। ऐसे में भारत, वियतनाम और जापान का करीब आना चीन के लिए चिंता की बात है। भारत एनएसजी का सदस्य बनना चाह रहा था तब चीन ने विरोध किया था। जब भारत पर पाकिस्तान से आने वाले चरमपंथी हमला करते हैं तब चीन संयुक्त राष्ट्र में उनका बचाव करता है। ऐसे में मोदी वियतनाम चीन को ये बताने के लिए ही गए हैं कि भारत भी कूटनीतिक दांव खेल सकता है?
मोदी का वियतनाम जाना इस बात का साफ संकेत है कि भारत आसानी से चीन के दबाव में आने वाला नहीं हैं। ऐसे में भारत, वियतनाम और जापान का करीब आना चीन के लिए चिंता की बात है। भारत एनएसजी का सदस्य बनना चाह रहा था तब चीन ने विरोध किया था। जब भारत पर पाकिस्तान से आने वाले चरमपंथी हमला करते हैं तब चीन संयुक्त राष्ट्र में उनका बचाव करता है। ऐसे में मोदी वियतनाम चीन को ये बताने के लिए ही गए हैं कि भारत भी कूटनीतिक दांव खेल सकता है?
बीबीसी (ब्रिटेन): भारतीय पीएम चीन के दबाव में आने वाले नहीं
मोदी का वियतनाम जाना इस बात का साफ संकेत है कि भारत आसानी से चीन के दबाव में आने वाला नहीं है। ऐसे में भारत, वियतनाम और जापान का करीब आना चीन के लिए चिंता की बात है। भारत एनएसजी का मेंबर बनना चाह रहा था तब चीन ने विरोध किया था। जब भारत पर पाकिस्तान से आने वाले कट्टरपंथी हमला करते हैं तब चीन यूएन में उनका बचाव करता है। ऐसे में मोदी, वियतनाम चीन को ये बताने ही गए है कि भारत भी कूटनीतिक दांव खेल सकता है।
मोदी का वियतनाम जाना इस बात का साफ संकेत है कि भारत आसानी से चीन के दबाव में आने वाला नहीं है। ऐसे में भारत, वियतनाम और जापान का करीब आना चीन के लिए चिंता की बात है। भारत एनएसजी का मेंबर बनना चाह रहा था तब चीन ने विरोध किया था। जब भारत पर पाकिस्तान से आने वाले कट्टरपंथी हमला करते हैं तब चीन यूएन में उनका बचाव करता है। ऐसे में मोदी, वियतनाम चीन को ये बताने ही गए है कि भारत भी कूटनीतिक दांव खेल सकता है।
आवाज-ए-पंजाब के CM कैंडिडेट हो सकते हैं सिद्धू, छोटेपुर बन सकते हैं पार्टी चीफ
चंडीगढ़.आप के कन्वीनर पद से हटाए गए सुच्चा सिंह छोटेपुर अब नवजोत सिद्धू, परगट सिंह और बैंस ब्रदर्स के नए फ्रंट आवाज-ए-पंजाब के चीफ कन्वीनर हो सकते हैं। छोटेपुर ने अपने सपोर्टर्स के साथ एक मीटिंग में इस बारे में रायशुमारी की। छोटेपुर सिद्धू के प्रपोजल से राजी हैं। सिद्धू चाहते हैं कि वे खुद सीएम कैंडिडेट हों और छोटेपुर पार्टी की जिम्मेदारी संभालें। इस बारे में जब छोटेपुर से पूछा गया तो उन्होंने कहा-मैं सिद्धू से नहीं मिला, लेकिन राजनीति में कुछ भी हो सकता है। उधर, छोटेपुर को हटाए जाने के बाद केजरीवाल ने गुरप्रीत घुग्गी को पंजाब का कन्वीनर बनाया है। किसने कराई छोटेपुर से बात...
- अकाली दल छोड़कर आए एक नेता ने दोनों गुटों में रजामंदी बनाने का काम किया। परगट सिंह ने भी पुष्टि की कि छोटेपुर से बात चल रही है।
- सिद्धू, परगट और बैंस बंधुओं का अपनी-अपनी सीटों को छोड़कर कहीं कोई असर नहीं है। जबकि, छोटेपुर के पास पूरे राज्य में संगठन का ढांचा है। इसीलिए सिद्धू उन्हें साथ लाना चाहते हैं।
- छोटेपुर ने माना कि बैंस ब्रदर्स के साथ उनकी नजदीकियां रही हैं। उन्होंने ही बलविंदर सिंह बैंस को अकाली दल अमृतसर के यूथ विंग का अध्यक्ष बनाया था। छोटेपुर तब अकाली दल अमृतसर के अध्यक्ष थे।
उधर, केजरीवाल संभालेंगे पंजाब में कमान, घुग्गी को बनाया कन्वीनर
- आम आदमी पार्टी में क्राइसिस से निपटने के लिए अब अरविंद केजरीवाल कमान संभालने जा रहे हैं। अपनी इस मुहिम को वे 8 सितंबर से शुरू करेंगे।
- उन्होंने सभी की उम्मीदों के उलट सिर्फ 7 महीने पहले अपना राजनीतिक सफर शुरू करने वाले गुरप्रीत घुग्गी को छोटेपुर की जगह पंजाब का कन्वीनर बना दिया है।
- घुग्गी इसी साल 10 फरवरी को आप में शामिल हुए थे। मदर टेरेसा को संत की उपाधि देने के प्रोग्राम में शामि होन वेटिकन सिटी गए केजरीवाल ने साफ किया कि वे 8 सितंबर को पंजाब में चुनावी कमान संभालने जा रहे हैं। वे यहां 4 दिन रहेंगे।
- सबसे पहला काम रूठे हुए लोगों को मनाना है। उन्होंने माना कि उनके वॉलंटियर कुछ कारणों के चलते न केवल नाराज हैं, बल्कि गुस्से में भी हैं।
- केजरीवाल जानते हैं कि लाेगों में अब भी आम आदमी पार्टी की बात है। लेकिन, जिस तरह से नाराजगी बढ़ रही है, उससे काफी नुकसान हो सकता है।
घुग्गी ही क्यों?
छोटेपुर को हटाने से पहले हिम्मत सिंह शेरगिल का नाम तय था। लेकिन, पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी ने गुरप्रीत घुग्गी के नाम पर मुहर लगा दी। पार्टी को ऐसे चेहरे की तलाश थी, जो न केवल विवादों से दूर हो, बल्कि उसकी पूरे पंजाब में पहचान हो। मान ऐसे चेहरे थे, लेकिन कई विवाद होने से उनके नाम पर सहमति नहीं बनी।
छोटेपुर को हटाने से पहले हिम्मत सिंह शेरगिल का नाम तय था। लेकिन, पॉलिटिकल अफेयर्स कमेटी ने गुरप्रीत घुग्गी के नाम पर मुहर लगा दी। पार्टी को ऐसे चेहरे की तलाश थी, जो न केवल विवादों से दूर हो, बल्कि उसकी पूरे पंजाब में पहचान हो। मान ऐसे चेहरे थे, लेकिन कई विवाद होने से उनके नाम पर सहमति नहीं बनी।
वोट बैंक बचेगा?
छोटेपुर के जाने से पार्टी का काफी बड़ा वोट बैंक उनके साथ चला गया है। केजरीवाल की दिक्कत यह है कि अब तक जितने भी लोगों को उन्होंने पार्टी से निलंबित किया, वे चुपचाप घर बैठ गए, लेकिन छोटेपुर पंजाबभर में यात्रा शुरू करने जा रहे हैं। केजरीवाल को लगता है कि यदि वे भी पूरे पंजाब में घूमे तो वर्कर उनके साथ आ सकते हैं।
छोटेपुर के जाने से पार्टी का काफी बड़ा वोट बैंक उनके साथ चला गया है। केजरीवाल की दिक्कत यह है कि अब तक जितने भी लोगों को उन्होंने पार्टी से निलंबित किया, वे चुपचाप घर बैठ गए, लेकिन छोटेपुर पंजाबभर में यात्रा शुरू करने जा रहे हैं। केजरीवाल को लगता है कि यदि वे भी पूरे पंजाब में घूमे तो वर्कर उनके साथ आ सकते हैं।
कितनी सीटों पर असर डाल सकता है आवाज-ए-पंजाब
बीजेपी से दूरी के बाद नवजोत सिंह सिद्धू ने अब पंजाब में एक नया मोर्चा बनाया है। इसका नाम है- अावाज-ए-पंजाब। राज्य में अगले साल चुनाव हैं। इससे पहले बीजेपी के पूर्व राज्यसभा सांसद सिद्धू के इस कदम को काफी अहम माना जा रहा है। सिद्धू के साथ इस मोर्चे में पूर्व हॉकी कैप्टन और ओलिंपियन परगट सिंह और बैंस ब्रदर्स- सिमरजीत सिंह और बलविंदर सिंह भी शामिल हैं। अगर यह फ्रंट चुनाव लड़ता है तो राज्य की 41 सीटों के नतीजों पर असर डाल सकता है।
- मशहूर हॉकी प्लेयर रहे परगट सिंह ने बीते शुक्रवार को अपने फेसबुक अकाउंट में भी इस मोर्चे का पोस्टर पोस्ट किया है। इसमें सिद्धू को परगट सिंह, सिमरजीत सिंह बैंस और बलविंदर सिंह के साथ दिखाया गया है।
- सिद्धू ने जुलाई में राज्यसभा की मेंबरशिप से इस्तीफा दे दिया था।
- पंजाब में अभी बीजेपी-अकाली दल अलायंस की सरकार है। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी असेंबली चुनाव की तैयारी में जोर-शोर से जुटी है।
- माना जा रहा है कि आवाज-ए-पंजाब के साथ राज्य में चौथे मोर्चे की जमीन तैयार हो गई है।
पंजाब की कितनी सीटों पर पड़ सकता है असर?
- सिद्धू पटियाला के रहने वाले हैं, अमृतसर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ते रहे हैं। यहां से 10 साल सांसद रहे हैं।
- परगट सिंह जालंधर ईस्ट से विधायक हैं। अकाली दल से सस्पेंड हो चुके हैं।
- परगट सिंह जालंधर ईस्ट से विधायक हैं। अकाली दल से सस्पेंड हो चुके हैं।
- सिमरजीत सिंह बैंस लुधियाना की आत्म नगर सीट और बलविंदर सिंह बैंस लुधियाना साउथ से निर्दलीय विधायक हैं।
- इन चारों जिलों में 41 विधानसभा सीटें हैं, जिन पर 'आवाज-ए-पंजाब' फ्रंट असर डाल सकता है।
- इन चारों जिलों में 41 विधानसभा सीटें हैं, जिन पर 'आवाज-ए-पंजाब' फ्रंट असर डाल सकता है।
किस जिले में कितनी विधानसभा सीटें?
जिला - विधानसभा सीटें
अमृतसर - 10
पटियाला - 8
जालंधर - 9
लुधियाना - 14
शनिवार, 3 सितंबर 2016
चीन को PoK का जवाब देने हनोई पहुंचे मोदी, 15 साल बाद किसी PM का वियतनाम दौरा
हनाेई.नरेंद्र मोदी एक अहम रणनीति के तहत शुक्रवार को चीन से पहले वियतनाम की राजधानी हनोई पहुंचे। 15 साल बाद किसी इंडियन पीएम का वियतनाम दौरा हुआ है। 2001 में अटल बिहारी वाजपेयी हनोई गए थे। मोदी के इस दौरे पर चीन की पूरी नजर रहेगी। साउथ चाइना सी दोनों देशों की बैठक का मुख्य एजेंडा रहेगा। इस क्षेत्र पर चीन अपना अधिकार जताता रहा है। यहां से मोदी जी-20 समिट में हिस्सा लेने के लिए चीन के हांगझोउ शहर को रवाना हो जाएंगे। अब तक किससे मिले मोदी...
- मोदी ने शहीद जवानों और नेशनल हीरो के स्मारक का दौरा किया। शहीदों को श्रद्धांजलि दी।
- 20वीं सदी के टॉप लीडर्स में से एक एक्स-पीएम हो चिन मिन्ह को श्रद्धांजलि देने उनकी कब्र पर पहुंचे।
- मोदी का वियतनाम के प्रेसिडेंशियल पैलेस में ग्रैंड वेलकम हुआ।
- यहां मोदी वियतनाम के प्राइम मिनिस्टर गुएन शुआन फुक और प्रेसिडेंट ट्रॉन दाई क्वांग से मिले।
- हनोई में मौजूद बौद्ध मंदिर कुआम सू पगोडा जाएंगे।
- रात में ही वे चीन के लिए रवाना हो जाएंगे।
- 20वीं सदी के टॉप लीडर्स में से एक एक्स-पीएम हो चिन मिन्ह को श्रद्धांजलि देने उनकी कब्र पर पहुंचे।
- मोदी का वियतनाम के प्रेसिडेंशियल पैलेस में ग्रैंड वेलकम हुआ।
- यहां मोदी वियतनाम के प्राइम मिनिस्टर गुएन शुआन फुक और प्रेसिडेंट ट्रॉन दाई क्वांग से मिले।
- हनोई में मौजूद बौद्ध मंदिर कुआम सू पगोडा जाएंगे।
- रात में ही वे चीन के लिए रवाना हो जाएंगे।
चीन को पीओके का जवाब है मोदी का वियतनाम दौरा
- क्यों अहम है यह दौरा?
- चीन-वियतनाम के बीच 3 बार जंग हो चुकी है। साउथ चाइना सी में भारत वियतनाम के साथ ऑयल एक्सप्लोरेशन कर रहा है। चीन को एतराज है।
- अभी हाल में हेग स्थित इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ने दक्षिण चीन सागर पर चीन के दावे को खारिज किया है। चीन भी इस फैसले को यह कहते हुए खारिज कर चुका है कि उसके लिए यह सिर्फ कागज का टुकड़ा है।
- हमारा 50 फीसदी समुद्री कारोबार इसी रास्ते से होता है। ऐसे में भारत तेल और गैस खोज जारी रख सकता है। इस दौरे में इसको लेकर कई नए समझौते होने की उम्मीद है।
- अभी हाल में हेग स्थित इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल ने दक्षिण चीन सागर पर चीन के दावे को खारिज किया है। चीन भी इस फैसले को यह कहते हुए खारिज कर चुका है कि उसके लिए यह सिर्फ कागज का टुकड़ा है।
- हमारा 50 फीसदी समुद्री कारोबार इसी रास्ते से होता है। ऐसे में भारत तेल और गैस खोज जारी रख सकता है। इस दौरे में इसको लेकर कई नए समझौते होने की उम्मीद है।
- डिप्लोमैटिक मायने क्या हैं?
- भारत की तरह वियतनाम भी चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर परेशानियां झेलता रहा है। वहीं चीन पाकिस्तान का समर्थन कर भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। ऐसे हालात में वियतनाम के साथ दोतरफा रिश्तों को मजबूत करना भारत की खास पहल मानी जाएगी।
- भारत की तरह वियतनाम भी चीन के साथ सीमा विवाद को लेकर परेशानियां झेलता रहा है। वहीं चीन पाकिस्तान का समर्थन कर भारत के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। ऐसे हालात में वियतनाम के साथ दोतरफा रिश्तों को मजबूत करना भारत की खास पहल मानी जाएगी।
- चीन के लिए क्या मैसेज छिपे हैं?
- जिस तरह पीओके को लेकर चीन पाकिस्तान का साथ देता रहता है, भारत भी उसी तर्ज पर जवाब देने के लिए वियतनाम से रिश्ते मजबूत कर रहा है। भारत डिफेंस एग्रीमेंट्स के जरिए वियतनाम की रक्षा पंक्ति को मजबूत करेगा। यह ठीक उसी तरह का होगा जैसे चीन हमेशा पाकिस्तान की मदद करता रहा है। एनएसजी में भारत को चीन का विरोध सहना पड़ा। ऐसे समय में भारत वियतनाम के जरिए चीन को कड़ा मैसेज देना चाहता है।
- जिस तरह पीओके को लेकर चीन पाकिस्तान का साथ देता रहता है, भारत भी उसी तर्ज पर जवाब देने के लिए वियतनाम से रिश्ते मजबूत कर रहा है। भारत डिफेंस एग्रीमेंट्स के जरिए वियतनाम की रक्षा पंक्ति को मजबूत करेगा। यह ठीक उसी तरह का होगा जैसे चीन हमेशा पाकिस्तान की मदद करता रहा है। एनएसजी में भारत को चीन का विरोध सहना पड़ा। ऐसे समय में भारत वियतनाम के जरिए चीन को कड़ा मैसेज देना चाहता है।
वियतनाम की दो तिहाई जनता का भारत पर भरोसा
- वियतनाम पर भारत का असर तेजी से बढ़ रहा है। प्यू ग्लोबल रिसर्च के एक सर्वे के मुताबिक वियतनाम की करीब दो तिहाई आबादी (66%) भारत के पक्ष में है। 18 से 29 साल के 72 फीसदी लोगों को भारत पर भरोसा है। सिर्फ 19% लोग चीन के पक्ष में है।
- वियतनाम पर भारत का असर तेजी से बढ़ रहा है। प्यू ग्लोबल रिसर्च के एक सर्वे के मुताबिक वियतनाम की करीब दो तिहाई आबादी (66%) भारत के पक्ष में है। 18 से 29 साल के 72 फीसदी लोगों को भारत पर भरोसा है। सिर्फ 19% लोग चीन के पक्ष में है।
मोदी के एजेंडे में डिफेंस, चार साल में वियतनाम का इम्पोर्ट 699% बढ़ा
- डिफेंस इक्विपमेंट्स:भारत ने डिफेंस इक्विपमेंट्स की खरीद के लिए वियतनाम को 100 मिलियन डॉलर का कर्ज देने का वादा किया है। मोदी इसे बढ़ाएंगे।
- बोट्स:भारत वियतनाम की नेवी की ताकत बढ़ाने के लिए चार हाई स्पीड पेट्रोलिंग बोट देगा।
- एक्सपोर्ट:भारत की कोशिश होगी कि वह वियतनाम के लिए बड़ा आर्म्स एक्सपोर्टर बने। क्योंकि पिछले चार में वियतनाम का डिफेंस इम्पोर्ट 699% बढ़ा है।
- ब्रह्मोस:वियतनाम भारत से ब्रह्मोस खरीद सकता है। भारत ने अरुणाचल में चीन बॉर्डर पर ब्रह्मोस मिसाइल तैनात की है।
- टॉरपीडो:जून में रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर वियतनाम गए थे। इसमें वियतनाम वरुणास्त्र टॉरपीडो खरीदने पर राजी हुआ था। संभव है कि इस दौरे पर बात बन जाए। यह टॉरपीडो समुद्र के अंदर 20 किमी. की रफ्तार से हमला कर सकता है। दुनिया में सिर्फ आठ देशों के पास ऐसे टारपीडो बना सकने की काबिलियत है।
- सबमरीन:भारत वियतनाम 6-किलो क्लास पनडुब्बी को ऑपरेट करने की ट्रेनिंग भी दे रहा है।
- बोट्स:भारत वियतनाम की नेवी की ताकत बढ़ाने के लिए चार हाई स्पीड पेट्रोलिंग बोट देगा।
- एक्सपोर्ट:भारत की कोशिश होगी कि वह वियतनाम के लिए बड़ा आर्म्स एक्सपोर्टर बने। क्योंकि पिछले चार में वियतनाम का डिफेंस इम्पोर्ट 699% बढ़ा है।
- ब्रह्मोस:वियतनाम भारत से ब्रह्मोस खरीद सकता है। भारत ने अरुणाचल में चीन बॉर्डर पर ब्रह्मोस मिसाइल तैनात की है।
- टॉरपीडो:जून में रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर वियतनाम गए थे। इसमें वियतनाम वरुणास्त्र टॉरपीडो खरीदने पर राजी हुआ था। संभव है कि इस दौरे पर बात बन जाए। यह टॉरपीडो समुद्र के अंदर 20 किमी. की रफ्तार से हमला कर सकता है। दुनिया में सिर्फ आठ देशों के पास ऐसे टारपीडो बना सकने की काबिलियत है।
- सबमरीन:भारत वियतनाम 6-किलो क्लास पनडुब्बी को ऑपरेट करने की ट्रेनिंग भी दे रहा है।
क्रूड ऑयल के लिए हो सकता है एलान
- मोदी क्रूड ऑयल सेक्टर में नए प्रोजेक्ट का एलान कर सकते हैं। 15 साल के लंबे इंतजार के बाद नए प्रोजेक्ट के एलान की उम्मीद। ONGC विदेश लिमिटेड यहां पिछले तीन दशक से तेल निकालने के प्रोजेक्ट में शामिल है।
- स्पेस सेक्टर और हाइड्रोकार्बन ब्लॉक में भारत के इन्वेस्टमेंट की उम्मीद।
- भारत-वियतनाम के बीच अभी कारोबार 7400 करोड़ रुपए है। 2020 तक इसे बढ़ाकर 10 हजार करोड़ ले जाने का टारगेट है।
- स्पेस सेक्टर और हाइड्रोकार्बन ब्लॉक में भारत के इन्वेस्टमेंट की उम्मीद।
- भारत-वियतनाम के बीच अभी कारोबार 7400 करोड़ रुपए है। 2020 तक इसे बढ़ाकर 10 हजार करोड़ ले जाने का टारगेट है।
एनएसजी पर मोदी करेंगे जिनपिंग से बात
- जी-20 देशों की बैठक में मोदी की कई हेड ऑफ द स्टेट से मुलाकात होगी।
- रविवार को मोदी चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग से मिलेंगे। दोनों के बीच एनएसजी पर बात हो सकती है। बता दें कि चीन ने ही भारत को एनएसजी मेंबरशिप हासिल करने से रोका था।
- बराक ओबामा के साथ मोदी की 5 सितंबर को मुलाकात होगी। संभवतः बतौर अमेरिकी प्रेसिडेंट ओबामा की मोदी से यह आखिरी मुलाकात होगी। ओबामा जनवरी में रिटायर होने वाले हैं।
- जी-20 में भारत टेरर फाइनेंसिंग और टैक्स चोरी रोकने समेत कई मुद्दे उठा सकता है।
- वर्ल्ड टैक्स रिफॉर्म, क्लाइमेट चेंज और एंटीबायोटिक्स की बाजार तक पहुंच बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
- जी-20 देशों की बैठक में मोदी की कई हेड ऑफ द स्टेट से मुलाकात होगी।
- रविवार को मोदी चीन के प्रेसिडेंट शी जिनपिंग से मिलेंगे। दोनों के बीच एनएसजी पर बात हो सकती है। बता दें कि चीन ने ही भारत को एनएसजी मेंबरशिप हासिल करने से रोका था।
- बराक ओबामा के साथ मोदी की 5 सितंबर को मुलाकात होगी। संभवतः बतौर अमेरिकी प्रेसिडेंट ओबामा की मोदी से यह आखिरी मुलाकात होगी। ओबामा जनवरी में रिटायर होने वाले हैं।
- जी-20 में भारत टेरर फाइनेंसिंग और टैक्स चोरी रोकने समेत कई मुद्दे उठा सकता है।
- वर्ल्ड टैक्स रिफॉर्म, क्लाइमेट चेंज और एंटीबायोटिक्स की बाजार तक पहुंच बनाने जैसे मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
गर्ल्स ने क्यों उड़ाई विधायकों की मजाक, बोली- गहलोत चुप हैं इसलिए कांग्रेस की दुर्गति
जयपुर।राजस्थान विधानसभा की कार्यवाही देखने आई जयपुर के एमजीडी स्कूल की गर्ल्स भी खुद को बेहद शर्मिंदा महसूस कर रही थीं। सदन में हंगामे, मार्शल की कार्रवाई और स्पीकर के रवैये और गहलोत की चुप्पी पर वे अवाक थीं। बोलीं- क्या यही होती है सदन की कार्यवाही। तब ही तो प्रदेश का यह हाल हो रहा है। और क्या-क्या बोली ये छात्राएं...
- हम बता दें कि राजस्थान विधानसभा का यह सत्र मुख्य रूप से जीएसटी बिल को पारित कराने के लिए बुलाया गया था।
- इसी सत्र के दूसरे दिन की कार्यवाही देखने ये छात्राएं यहां आई थीं।
- सदन में विपक्ष ने जमकर नारेबाजी की, हंगामा किया। फिर स्पीकर ने उन्हें मार्शल के माध्यम से बाहर निकलवा दिया।
- इसे देख वे चौंक गईं। इन गर्ल्स के बाहर निकलने पर उन्होंने अलग-अलग तरह की प्रतिक्रिया दी।
- गर्ल्स बोलीं- आश्चर्य है। ऐसे हंगामा होता है क्या यहां। क्या इसे ही पूरा देश सदन की कार्यवाही कहता है क्या।
- क्या ये विधायक ऐसे ही हल्ला मचाते हैं।
वे तो कानून बनाने वालों को बहुत गंभीर मानती थीं
- असल में छात्राएं बड़ी उम्मीद के साथ यहां आई थीं। सोचा था कि कानून बनाने वाले विधायक देखते हैं कैसे विधायी कार्य पूरे करते हैं।
- कैसे आम लोगों की समस्याओं को सदन में उठाते हैं। उन पर सरकार किस तरह रिएक्शन देती है। कैसे उन कामों को पूरा कराने की बात करती है।
- हुआ उलटा। छात्राओं का कहना था कि उनकी उम्मीद तो टूट ही गई।
- वे बोली- उन्हें आश्चर्य है कि विधानसभा में इस तरह लड़ाई होती है।
- मार्शल कैसे काम में बाधा डालने वाले विधायकों को बाहर निकाल देते हैं।
- असल में छात्राएं बड़ी उम्मीद के साथ यहां आई थीं। सोचा था कि कानून बनाने वाले विधायक देखते हैं कैसे विधायी कार्य पूरे करते हैं।
- कैसे आम लोगों की समस्याओं को सदन में उठाते हैं। उन पर सरकार किस तरह रिएक्शन देती है। कैसे उन कामों को पूरा कराने की बात करती है।
- हुआ उलटा। छात्राओं का कहना था कि उनकी उम्मीद तो टूट ही गई।
- वे बोली- उन्हें आश्चर्य है कि विधानसभा में इस तरह लड़ाई होती है।
- मार्शल कैसे काम में बाधा डालने वाले विधायकों को बाहर निकाल देते हैं।
गहलोत अंकल ने यहां भी कुछ नहीं किया, इसलिए ही तो कांग्रेस की ये हालत हो गई
- ये स्कूली गर्ल्स पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अच्छी तरह पहचानती थीं।
- वे उनकी हर हरकत पर नजर गड़ाए हुए थीं।
- बाहर आकर बोलीं- गहलोत अंकल तो सदन में चुपचाप बैठे रहे।
- वे तो कांग्रेसी हैं, तो फिर उन्होंने हंगामा करने वाले कांग्रेसी विधायकों का साथ क्यों नहीं दिया।
- कहा- हंगामा होता रहा, लेकिन अशोक गहलोत ने कुछ नही किया।
- गर्ल्स चुटकी लेने में भी पीछे नहीं रहीं। बोलीं- गहलोत अंकल चुप रहे, कुछ किया नहीं, इसीलिए तो कांग्रेस की आज ये हालत हो गई है।
- ये स्कूली गर्ल्स पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अच्छी तरह पहचानती थीं।
- वे उनकी हर हरकत पर नजर गड़ाए हुए थीं।
- बाहर आकर बोलीं- गहलोत अंकल तो सदन में चुपचाप बैठे रहे।
- वे तो कांग्रेसी हैं, तो फिर उन्होंने हंगामा करने वाले कांग्रेसी विधायकों का साथ क्यों नहीं दिया।
- कहा- हंगामा होता रहा, लेकिन अशोक गहलोत ने कुछ नही किया।
- गर्ल्स चुटकी लेने में भी पीछे नहीं रहीं। बोलीं- गहलोत अंकल चुप रहे, कुछ किया नहीं, इसीलिए तो कांग्रेस की आज ये हालत हो गई है।
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